वॉलीबॉल के खेल ने एक सदी से भी अधिक समय तक दुनिया पर अपनी छाप छोड़ने का काम किया है। इस खेल की शुरुआत बहुत ही साधारण तरीके से हुई। वॉलीबॉल के जनक माने जाने वाले जी मॉर्गन (G Morgan) ने 1895 में एक विचार साझा किया, यह उन लोगों के लिए था जो बास्केटबॉल में ‘झटका’ या ‘धक्का’ लगने के डर की वजह से किसी अन्य शारीरिक गतिविधि या खेल के विकल्प की तलाश कर रहे थे। इसके बाद मॉर्गन ने कई खेलों के विभिन्न पहलुओं पर नज़र डाली और उन चीज़ों की तलाश की जो उनकी सोच के मुताबिक सही बैठे। बास्केटबॉल के खेल से ‘गेंद’, टेनिस से ‘नेट’ और हैंडबॉल से ‘हाथों का इस्तेमाल’ – इन तीनों चीज़ों मिलाकर वॉलीबॉल एक नया खेल बन गया। बाद में इस खेल को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसमें सेट जोड़ दिया गया, जिसे बेसबॉल से लिया गया। मैसाचुसेट्स के होल्योके में यंग मेंस क्रिस्टैन एसोसिएशन (YMCA) के फिज़िकल डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत मॉर्गन ने इस खेल की शुरुआत की। उस समय इसे मिंटोनेट्टे के नाम से जाना जाता था। फिर एक साल बाद मैसाचुसेट्स के स्प्रिंगफील्ड कॉलेज में YMCA फिजिकल डायरेक्टर की एक कॉन्फ़्रेंस में इस खेल पर एक बार फिर विचार किया गया और यह तय हुआ कि बिना किसी तय नियम और खेल फॉर्मेट के यह अधूरा है। आखिरकार यह खेल प्रतिनिधि मंडल का दिल जीतने में कामयाब रहा और जल्द ही पूरे अमेरिका में YMCA के बड़े नेटवर्क में इसे एक नए नाम ‘वॉली बॉल’ (शुरुआत में इसे दो अलग शब्दों में बांटा गया) के नाम से जाना जाने लगा। बास्केटबॉल, बेसबॉल, टेनिस और हैंडबॉल की अलग-अलग खूबियों से मिलकर बने इस खेल को आज विश्व स्तर पर करीब 800 मिलियन से अधिक लोग खेलते हैं। यह खेल लोगों ने कितना पसंद किया, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं।
एक अंतरराष्ट्रीय निकाय की देखरेख में आगे बढ़ रहे इस खेल और इसकी लोकप्रियता ने जल्द ही साल 1957 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) का ध्यान खींचा। जिसके चलते कुछ समय बाद ही इसे इनडोर वॉलीबॉल ओलंपिक खेल का दर्जा दे दिया गया। हांलाकि, ओलंपिक डेब्यू करने से पहले इस कुछ और वर्षों का इंतज़ार करना पड़ा। अंतत: 1964 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में पहली बार इस खेल को शामिल किया गया। सोवियत संघ की पुरुषों की वॉलीबॉल टीम ने ओलंपिक में खेल के शुरुआती वर्षों में अपना दबदबा कायम रखते हुए तीन स्वर्ण पदक (टोक्यो 1964, मैक्सिको 1968, मास्को 1980), एक रजत (मॉन्ट्रियल 1976) और एक कांस्य पदक (म्यूनिख 1972) जीता। संयुक्त राज्य अमेरिका की पुरुषों की वॉलीबॉल टीम ने लॉस एंजेलिस 1984 और सियोल 1988 में लगातार स्वर्ण पदक जीते, जबकि 1984 की रजत पदक विजेता ब्राजील की टीम ने 1992 में इस खेल में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। यूएसए ने अपना तीसरा स्वर्ण बीजिंग 2008 में जीता और ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में सोवियत संघ के साथ खेल में संयुक्त रूप से सबसे सफल टीम बन गई। ब्राज़ील मौजूदा ओलंपिक चैंपियन है, जिसने रियो 2016 में इटली पर जीत हासिल करते हुए घरेलू जमीं पर अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता। ब्राज़ील (तत्कालीन सोवियत संघ) और इटली ने ओलंपिक खेलों में वॉलीबॉल में सबसे अधिक छह पदक हासिल किए हैं। दक्षिण अमेरिकी टीम अपने तीन स्वर्ण और तीन सिल्वर पदक के साथ सबसे सफल टीम का सम्मान हासिल किए हुए है। महिलाओं की टीमों में पांच देशों ने वॉलीबॉल में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते हैं, जिसमें सोवियत संघ ने छह (चार स्वर्ण और दो सिल्वर) पदकों के साथ सबसे आगे है। जापान और सोवियत संघ ने 1964 से 1980 तक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पहले चार स्वर्ण पदक मैच खेले। जापान ने 1964 में टोक्यो में अपनी घरेलू धरती पर पहला फाइनल जीता था, जबकि सोवियत संघ ने 1968 के खेलों और 1972 में म्यूनिख में स्वर्ण पदक जीतने के लिए जापान को मात दी थी। जापान ने इसके बाद मॉन्ट्रियल 1976 में अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता था। सोवियत संघ ने मॉस्को 1980 और सियोल 1988 में जीत हासिल करने के साथ दो और स्वर्ण पदक अपने खाते में जोड़ने का काम किया, जबकि चीन ने लॉस एंजेलिस 1984 और एथेंस 2004 में अपने दो-तीन पदक हासिल किए। क्यूबा ने बार्सिलोना 1992, अटलांटा 1996 और सिडनी 2000 में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते, जबकि ब्राजील की महिलाओं की वॉलीबॉल टीम इस खेल में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली तीसरी टीम बन गई, जो उसने बीजिंग 2008 और लंदन 2012 में जीता। रियो 2016 में सर्बिया को हराकर चीन महिलाओं की वॉलीबॉल टीम को हराकर मौजूदा चैंपियन बन गई। जहां 1964 के ओलंपिक खेलों में महिलाओं की श्रेणी में केवल छह टीमें हिस्सा लीं, वहीं 1988 के ओलंपिक खेलों तक यह संख्या दोगुनी हो गई और तब से अब तक 12 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
वॉलीबॉल भारत में शौकिया तौर पर तो खेला जाता था लेकिन स्वतंत्रता से पहले 1936 में इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (Indian Olympic Association IOA) ने पहली इंटरस्टेट चैंपियनशिप कराई। इसके बाद 1951 में इस खेल का ढांचा तैयार किया गया और इसे नाम दिया गया वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (Volleyball Federation of India VFI)। इसके अगले ही साला यानी 1952 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप (Senior National Championship) की पहली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके बाद कई युवाओं ने इस खेल में रूचि दिखाई और भारत को नया कौशल देखने को मिला और इस तरह बनी भारतीय वॉलीबॉल टीम।